
Bihar Topper Full Interview 2025 || Anshu Kumari Rank -1 Interview
बिहार टॉपर (Rank 1): प्लंबर की बेटी ने रचा इतिहास!
अंशु कुमारी की संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी
पश्चिमी चंपारण की रहने वाली अंशु कुमारी ने 15-16 लाख विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए पूरे बिहार में पहला (1st) स्थान (489 अंक) प्राप्त किया है। उनके पिता एक 'प्लंबर' (Plumber) का काम करते हैं और उनकी माता एक कैंसर सर्वाइवर (Cancer Survivor) रह चुकी हैं। गरीबी और मुश्किल हालातों के बावजूद अंशु ने सिर्फ 'सेल्फ स्टडी' और 'दिशा ऑनलाइन क्लासेज' (यूट्यूब) की मदद से यह मुकाम हासिल किया। आइए जानते हैं इस होनहार छात्रा की रणनीति!
🌟 अंशु की सफलता के 4 बड़े राज
1. रूटीन और सेल्फ स्टडी
- अंशु स्कूल और कोचिंग के समय को छोड़कर, रोज 7 से 8 घंटे केवल 'सेल्फ स्टडी' करती थीं।
- उनका फिक्स रूटीन नहीं था, लेकिन वह रोज सभी विषय (All Subjects) जरूर पढ़ती थीं।
- वह रात के 11:00 बजे तक पढ़ती थीं और सुबह 6:00 बजे उठ जाती थीं।
2. फ्री यूट्यूब वीडियोस से पढ़ाई
- अंशु ने दिशा ऑनलाइन क्लासेज का कोई पेड बैच (Paid Batch) नहीं खरीदा था, बल्कि यूट्यूब (YouTube) पर मौजूद फ्री वीडियोस देखकर पढ़ाई की।
- कोचिंग में केवल मैथ्स और साइंस पढ़ती थीं, बाकी सभी विषयों की तैयारी उन्होंने ऑनलाइन ही की थी।
3. नवंबर तक सिलेबस खत्म और क्वेश्चन बैंक
- उन्होंने नवंबर महीने तक अपना पूरा सिलेबस खत्म कर लिया था।
- इसके बाद उन्होंने 2011 से 2024 तक का पूरा क्वेश्चन बैंक (PYQ) सॉल्व किया।
- एग्जाम हॉल की तरह टाइम सेट करके मॉडल पेपर लिख-लिखकर प्रैक्टिस की, जिससे स्पीड बढ़ गई।
4. माता-पिता का संघर्ष बना 'मोटिवेशन'
- जब भी अंशु का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, वह अपनी बीमार (कैंसर पेशेंट) माँ का चेहरा याद कर लेती थीं।
- पिता को प्लंबर का काम करते देख वह सोचती थीं कि मेहनत करनी है, ताकि आगे उन्हें मजदूरी न करनी पड़े। यही उनका असली मोटिवेशन था।
✍️ परीक्षा हॉल की रणनीति (Exam Strategy)
✅ टाइम मैनेजमेंट और राइटिंग
घर पर लिखने की बहुत प्रैक्टिस की थी, इसलिए 3 घंटे का पेपर बहुत पहले ही खत्म हो गया। हैंडराइटिंग बहुत सुंदर और 'सजाकर' लिखी थी। टॉपिक ब्लैक (Black) पेन से और उत्तर ब्लू (Blue) पेन से लिखे!
✅ प्रश्नों को चुनने का तरीका
अगर 8 में से 4 प्रश्न बनाने होते थे, तो अंशु हमेशा बढ़ते क्रम (Ascending Order) में प्रश्नों को हल करती थीं (जैसे: पहले 1, फिर 3, फिर 6)। इससे परीक्षक (Examiner) पर अच्छा प्रभाव पड़ता है!
🎯 2026 के छात्रों के लिए 'अंशु' की सलाह
- ✅ सिर्फ NCERT पढ़ें: अन्य पब्लिकेशन्स के बजाय केवल NCERT बुक्स को लाइन-बाय-लाइन खुद से पढ़ें।
- ✅ मंथली एग्जाम को सीरियस लें: स्कूल में होने वाले मंथली एग्जाम्स को सीरियसली लें और पूरे अंक का पेपर सॉल्व करें।
- ✅ लिखने की प्रैक्टिस (Written Revision): केवल पढ़-पढ़ कर रिवीजन न करें, बल्कि उत्तरों को लिख-लिखकर (Retain) याद करें।
- ✅ वायरल क्वेश्चन से बचें: एग्जाम से पहले 'वायरल क्वेश्चंस' के चक्कर में न रहें, बल्कि पूरा सिलेबस अच्छे से पढ़ कर जाएं।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंशु कुमारी की कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी रुकावट उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। एक गरीब प्लंबर की बेटी ने 'यूट्यूब' से पढ़कर पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर लिया। उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना है। क्या आप भी अंशु की तरह अपने माता-पिता का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं?