Disha Online Classes और Sanjay Sir के
मार्गदर्शन में अंकुश ने हासिल किया Rank 7
बिना पंखे के सपने देखने वाले लड़के की ऐतिहासिक सफलता का सफर
बिहार के भागलपुर जिले के सादपुर गांव की शांत और ग्रामीण वादियों में अंकुश नाम का एक लड़का रहता था। दूर से देखने पर अंकुश एक आम बच्चे जैसा ही था—एक ऐसा लड़का जो अपना दिन खेतों में काम करने, फसलें बोने और चिलचिलाती धूप में गाय चराने में बिताता था। लेकिन उसके इस शांत स्वभाव के पीछे बिहार बोर्ड में Rank 7 हासिल करने की बहुत बड़ी महत्वाकांक्षा का तूफान पल रहा था।
गांव में जगी उम्मीद की किरण
अंकुश की कहानी बहुत बड़े और नामुमकिन से लगने वाले सपनों के साथ शुरू नहीं हुई थी। सच तो यह है कि 9वीं कक्षा तक वह पढ़ाई में सिर्फ एक औसत छात्र ही था। लेकिन एक छोटे से गांव में, लोगों की बातें अक्सर किस्मत तय करने का काम करती हैं। उसके पड़ोसियों और गांव वालों ने उससे कहना शुरू कर दिया, "तुमको तो टॉप करना है।" उनके विश्वास से प्रेरित होकर, अंकुश ने ठान लिया कि वह 10वीं की बोर्ड परीक्षा सिर्फ पास नहीं करेगा, बल्कि Rank 7 जैसा मुकाम हासिल करके दिखाएगा।
ना एसी, ना ही कोई पंखा
जब दिशा ऑनलाइन क्लासेस के मार्गदर्शक और बेहतरीन शिक्षक, संजय सर, अंकुश का इंटरव्यू लेने उसके घर पहुंचे, तो वे अपनी पुरानी यादों में खो गए। मिट्टी और ईंटों का घर और संसाधनों की भारी कमी ने संजय सर को उनके अपने बचपन के संघर्षों की याद दिला दी।
संजय सर ने आज के दौर का एक बहुत ही आम सवाल पूछा: "क्या आपके घर में एसी है?"
अंकुश ने बहुत ही सहजता और सच्चाई से जवाब दिया, "नहीं सर। मैं जिस जगह बैठकर पढ़ता हूँ, वहां पंखा भी नहीं है।"
जहां राज्य भर के अन्य छात्र कम नंबर आने पर संसाधनों की कमी का बहाना बनाते थे, वहीं अंकुश समर्पण की एक नई परिभाषा लिख रहा था। उसने दिन में 6 से 7 घंटे पढ़ाई की और यह साबित कर दिया कि Rank 7 लाने के लिए एयर कंडीशनर की नहीं, बल्कि सीने में धधकती आग और दिशा ऑनलाइन क्लासेस जैसे सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
सफलता का डिजिटल पुल: दिशा ऑनलाइन क्लासेस
अंकुश के सफर में एक अहम मोड़ तब आया जब एक सीनियर छात्र ने उसे दिशा ऑनलाइन क्लासेस के बारे में बताया। एक सुदूर गांव के लड़के के लिए, संजय सर का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म Rank 7 तक पहुँचने का सबसे बड़ा जरिया बन गया। उसने दिशा ऑनलाइन क्लासेस के क्रैश कोर्स में दाखिला लिया।
संजय सर के मार्गदर्शन में उसकी रणनीति बहुत ही अचूक थी:
- पूरा सिलेबस खत्म करना: दिशा ऑनलाइन क्लासेस के बेहतरीन लेक्चर्स की मदद से उसने कोई भी चैप्टर नहीं छोड़ा।
- भाषा के विषयों पर पकड़: संजय सर के खास निर्देशों का पालन करते हुए उसने अपनी राइटिंग स्किल (लिखावट) पर बहुत जोर दिया।
- टेस्ट के जरिए खुद को परखना: दिशा ऑनलाइन क्लासेस के टेस्ट्स को उसने एक आईने की तरह इस्तेमाल किया।
मेहनत का फल: बिहार बोर्ड में Rank 7
जब आखिरकार नतीजे घोषित हुए, तो अंकुश की कड़ी मेहनत और संजय सर के सटीक मार्गदर्शन ने सबसे मीठा फल दिया। 500 में से उसने शानदार 484 अंक हासिल किए और पूरे राज्य में Rank 7 प्राप्त किया!
- गणित: 99
- SST: 96
- हिंदी: 95
- संस्कृत: 96
- विज्ञान: 96
वह अपने गांव के इतिहास का पहला ऐसा छात्र बन गया जिसे बिहार बोर्ड की तरफ से "टॉपर वेरिफिकेशन कॉल" आया था। जिस गांव ने उस पर विश्वास का बीज बोया था, वह अब अपने Rank 7 टॉपर का जश्न मना रहा था।
भविष्य की उड़ान
आज, अंकुश सिर्फ अपनी इस कामयाबी पर रुकने वाला नहीं है। उसकी नजरें एक बहुत बड़े लक्ष्य पर टिकी हैं: UPSC क्रैक करके IAS ऑफिसर बनना।
उसकी कहानी आने वाले कल के छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश छोड़ जाती है, जिसे संजय सर की क्लास के दौरान कही गई उस शायरी में बहुत ही खूबसूरती से पिरोया गया है:
"तू हंस, तू मुस्कुरा, तू रोना कम कर दे。
तू जिंदा है, तू जिंदगी की नाक में दम कर दे।"
अंकुश का इंटरव्यू वीडियो देखें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
इस पूरी यात्रा में, एक साधारण और अभावग्रस्त छात्र को बिहार का स्टेट टॉपर बनाने और पूरे राज्य में Rank 7 दिलाने में दिशा ऑनलाइन क्लासेस और संजय सर का बहुत बड़ा और अतुलनीय योगदान रहा है!